आखिर जम्मू के साथ नाइंसाफी क्यों? अगर लदाख की अलग यूनियन टेरिटरी की मांग मानी जा सकती है तोह फिर जम्मू की जनता के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया गया?
जम्मू कश्मीर और लदाख यह पहले एक देश हुआ करता था फिर भारत का हिस्सा बना। अब धारा 370 और 35 A कानून हटाकर इसे भारत की यूनियन टेरिटरी बना दिया गया। जम्मू कश्मीर को अलग यूनियन टेरिटरी और लदाख की बहुत पुराणी मांग को मानकर लदाख को अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया पर जम्मू की जनता की 70 वर्षो से चली आ रही है अलग डोगरा राज्य "जम्मू" की मांग को अनसुना कर दिया गया और जम्मू को अलग राज्य ना बनाकर फिर कश्मीर के साथ ही रखा गया। आखिर क्यों जम्मू के साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया गया? क्या जम्मू का कसूर इतना भर है उसने हमेशा राष्ट्रवादी ताकतों का साथ दिया या उसका कसूर इतना भर है बो कश्मीर का एक अंग है, अगर कश्मीर का अंग है तोह लदाख भी तोह जम्मू कश्मीर का ही हिस्सा है उसको क्यों अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया?
अलग यूनियन टेरिटरी बनने के बाद जम्मू की जनता में आक्रोश बड़ा है, धारा 370 टूटने के बाद जिधर "काशी की तर्ज़" पर जम्मू का विकास करने के सपने दिखाए गए थे बो मात्र एक मज़ाक बनकर रह गया जम्मू को मिली तोह सिर्फ शराब की दुकानें ,पहले ही 250 के करीब शराब की दुकाने खुली हुयी थी उसके बाबजूद 51 और शराब की दुकाने खोलने का आदेश दे दिया गया जनता इसका विरोध कर रही है पर जबरन इस तरह के कानून थोपे जा रहे है। युवा सड़को पर है कई नौकरियां स्थगित कर दी गयी और कइयों की नौकरियां छिन ली गयी इस वक़्त पूर्ण रूप से जम्मू की जनता त्राहि त्राहि कर रही है, पर धारा 370 को हटाने वाली भाजपा सरकार सिर्फ मीडिया पर मात्र नौटंकी करते ही नज़र आ रही है।
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