आखिर क्यों जम्मू कश्मीर के बाहर राज्य के इतिहासकार जम्मू कश्मीर के डोगरा शासक "महाराजा हरी सिंह" जी की छवि को धूमिल करने का प्रयास करते है?
डोगरा कभी हारे नही:-
बात है तब की जब 1947 को जब भारत अंग्रेज़ो से आज़ाद हुया तब लोकतंत्र में शामिल होने का प्रस्ताव "महाराजा हरी सिंह" जी को भी दिया गया, पर उस वक़्त महाराजा को लोकतंत्र व्यबस्था पर इतना भरोसा नही था जिसके चलते उन्होंने इस व्यबस्था से इनकार कर दिया।
उसके कुछ सालों बाद पाकिस्तान ने क़वालियो के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर देश पर आक्रमण कर दिया उस वक़्त जम्मू कश्मीर में राजशाही व्यबस्था लागू थी।
पाकिस्तान उस वक़्त के आधुनिक हथियारों से लैस था, और डोगरा फौज उस वक़्त तादाद में इतनी ज्यादा नही थी। जिसका परिणाम यह हुआ पाकिस्तानी फौज हावी होने लगी तभी महाराजा हरी सिंह जी को अपनी जनता की चिंता सताने लगी अब क्या किया जाए?
तब उन्होंने अपनी इस हार को जीत में परिवर्तन के लिए महाराजा हरी सिंह जी ने एक एहम समझौता भारतीय सरकार के साथ किया कि में राजशाही व्यबस्था को लोकतंत्र में परिवर्तित करने के लिए तैयार हूं, आप अपनी सेना को डोगरा सेना की मदद के लिए भेजिए।
तब उस वक़्त के प्रधानमंत्री "पंडित जवाहर लाल नेहरू" जी ने भारतीय सेना को जम्मू कश्मीर में भेजा।
पर कुछ मूर्ख एक राजनीतिक पार्टी के समर्थक डोगरा शासक महाराजा हरी सिंह जी की छवि को धूमिल करने का प्रयास करते है अपमान यह कहकर करते है उन्होंने पाकिस्तान से डर के कारण भारत का हाथ थामा, उन्हें रात को नींद तक नही आई। यह सिर्फ इसलिए लिखा गया कल को कोई भारतीय सरकारों को यह ना कहे आपने जबरन जम्मू कश्मीर पर कब्ज़ा कर लिया है या कुछ और जबकि सच्चाई इसके उलट थी। यह मात्र डोगरों के शौर्य को कलंकित करने का प्रयास मात्र है जिसकी सच्चाई ठीक इसके विपरीत है।
डोगरों ने पाकिस्तान पर विजय हासिल करने के मकसद से भारतीय फौज को मदद के लिए बुलाया था।
डोंगरे आजतक कोई जंग नही हारे है, बो डोगरा समुदाय ही था जब पूरे भारत पर अंग्रेज़ो का शासन था तब भी इन्होंने जम्मू कश्मीर पर अंग्रेज़ो का शासन नही होने दिया। जब भारत ग़ुलामी की जंज़ीरों में बंधा हुआ था उस वक़्त भी डोगरा जवानों ने प्रथम विश्व युद्ध मे अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था।
इसलिए डोगरों के महाराजा हरी सिंह जी को कलंकित करने वाले ऐसे फ़र्ज़ी इतिहासकारों पर कभी भरोसा नही किया जा सकता।
यह बात किस तरह सिद्ध होती है?
सभी जानते है धारा 370 और 35 A जम्मू कश्मीर में लगी हुई थी जिसमे जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार दिए थे। यह महाराजा हरी सिंह जी की सूझबूझ का ही हिस्सा था। महाराजा हरी सिंह अपनी प्रजा हित में सोचने वाले शख्स थे, जिन्होंने अपनी सुझभुझ के बलबूते पर जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनने से बचाया भी और अपनी हार को जित में बदलकर भी दिखाया। इसीलिए आज भी जम्मू कश्मीर की जनता के दिल में बसते है महाराजा हरी सिंह।
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