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क्या कभी "Kashmir File" जैसी कोई फ़िल्म जम्मू के डोगरो पर भी बनेगी?

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जम्मू का डोगरा आज भी लड़ रहा है। क्या कभी इनपर कोई फ़िल्म बनेगी कभी? डोगरा शुरुआत से ही लड़ रहा है। 1) पहले बाहरी देशो से आहने वाली ताक़तों (मुग़ल, पाकिस्तान) का सामना सबसे पहले डोगरो ने किया। डोगरो ने ही अफ़ग़ानिस्तान से आहने वाली देश विरोधी ताकतों का सामना किया सबसे पहले। 2) डोगरो को इसका नुकसान अपना डुग्गर देश को खोकर चुकाना पड़ा। 3) डुग्गर देश बन गया डुग्गर परदेश (जम्मू कश्मीर) 4) डुग्गर परदेश बनने के बाद भी यह हमले रुके नही। डुग्गर देश की पवित्रता पर हमले फिर भी जारी रहे (ज़मीन जिहाद, कश्मीरी पंडितो पर हमले आधी।) 5) फिर डोगरो ने अपना डुग्गर परदेश भी खो दिया, बन गया केंद्र शासित जम्मू कश्मीर। 6) हमले फिर भी नही रुके, मंदिरो के शहर में 300 शराब की दुकाने जम्मू में खोलकर जम्मू के युवाओ पर हमले। 7) आतंकवाद से डोगरा अलग से लड़ता रहा। सवाल सिर्फ एक क्या "डोगरो" पर कभी कोई फ़िल्म बन पाएगी कभी?

आखिर क्यों जम्मू कश्मीर के बाहर राज्य के इतिहासकार जम्मू कश्मीर के डोगरा शासक "महाराजा हरी सिंह" जी की छवि को धूमिल करने का प्रयास करते है?

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डोगरा कभी हारे नही:- बात है तब की जब 1947 को जब भारत अंग्रेज़ो से आज़ाद हुया तब लोकतंत्र में शामिल होने का प्रस्ताव "महाराजा हरी सिंह" जी को भी दिया गया, पर उस वक़्त महाराजा को लोकतंत्र व्यबस्था पर इतना भरोसा नही था जिसके चलते उन्होंने इस व्यबस्था से इनकार कर दिया। उसके कुछ सालों बाद पाकिस्तान ने क़वालियो के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर देश पर आक्रमण कर दिया उस वक़्त जम्मू कश्मीर में राजशाही व्यबस्था लागू थी। पाकिस्तान उस वक़्त के आधुनिक हथियारों से लैस था, और डोगरा फौज उस वक़्त तादाद में इतनी ज्यादा नही थी। जिसका परिणाम यह हुआ पाकिस्तानी फौज हावी होने लगी तभी महाराजा हरी सिंह जी को अपनी जनता की चिंता सताने लगी अब क्या किया जाए? तब उन्होंने अपनी इस हार को जीत में परिवर्तन के लिए महाराजा हरी सिंह जी ने एक एहम समझौता भारतीय सरकार के साथ किया कि में राजशाही व्यबस्था को लोकतंत्र में परिवर्तित करने के लिए तैयार हूं, आप अपनी सेना को डोगरा सेना की मदद के लिए भेजिए। तब उस वक़्त के प्रधानमंत्री "पंडित जवाहर लाल नेहरू" जी ने भारतीय सेना को जम्मू कश्मीर में भेजा। पर कुछ मूर्ख एक राजनीतिक पा...

आखिर जम्मू के साथ नाइंसाफी क्यों? अगर लदाख की अलग यूनियन टेरिटरी की मांग मानी जा सकती है तोह फिर जम्मू की जनता के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया गया?

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जम्मू कश्मीर और लदाख यह पहले एक देश हुआ करता था फिर भारत का हिस्सा बना। अब धारा 370 और 35 A कानून हटाकर इसे भारत की यूनियन टेरिटरी बना दिया गया। जम्मू कश्मीर को अलग यूनियन टेरिटरी और लदाख की बहुत पुराणी मांग को मानकर लदाख को अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया पर जम्मू की जनता की 70 वर्षो से चली आ रही है अलग डोगरा राज्य "जम्मू" की मांग को अनसुना कर दिया गया और जम्मू को अलग राज्य ना बनाकर फिर कश्मीर के साथ ही रखा गया। आखिर क्यों जम्मू के साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया गया? क्या जम्मू का कसूर इतना भर है उसने हमेशा राष्ट्रवादी ताकतों का साथ दिया या उसका कसूर इतना भर है बो कश्मीर का एक अंग है, अगर कश्मीर का अंग है तोह लदाख भी तोह जम्मू कश्मीर का ही हिस्सा है उसको क्यों अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया? अलग यूनियन टेरिटरी बनने के बाद जम्मू की जनता में आक्रोश बड़ा है, धारा 370 टूटने के बाद जिधर "काशी की तर्ज़" पर जम्मू का विकास करने के सपने दिखाए गए थे बो मात्र एक मज़ाक बनकर रह गया जम्मू को मिली तोह सिर्फ शराब की दुकानें ,पहले ही 250 के करीब शराब की दुकाने खुली हुयी थी उसके बाबजूद ...

आखिर जम्मू की जनता चाहती क्या है? क्या मांगे है जम्मू की?

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जम्मू रीजन जिसको एक वक़्त डुग्गर देश कहा जाता है आज बो अपनी डुग्गर प्रदेश की पहचान बचाने की जद्दोजेहद में है। जम्मू की जनता जम्मू को कश्मीर से अलग जम्मू राज्य चाहती है जिसको डुग्गर प्रदेश की उपाधि दी जाए। जिसमे 5 प्रोविंस, 5 पार्लियामेंट, 75 असेंबली सीट्स + 35 जिला। , और कुछ बिशेष सुविधाये चाहती है जैसे: इंडियन डिफेन्स विश्वविद्यालय, इंडियन मिलिट्री अकैडमी, इंडियन स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय + 24 घण्टे चलने वाला नेशनल न्यूज़ चैनल , ज़मीनो और नौकरियों के विशेष अधिकार ।

जम्मू के साथ आखिर नाइंसाफी क्यों? अगर लदाख को अलग यूनियन टेरिटरी का दर्ज़ा दिया गया तोह जम्मू को अलग राज्य क्यों नही?

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जम्मू कश्मीर और लदाख यह पहले एक देश हुआ करता था फिर भारत का हिस्सा बना। अब धारा 370 और 35 A कानून हटाकर इसे भारत की यूनियन टेरिटरी बना दिया गया। जम्मू कश्मीर को अलग यूनियन टेरिटरी और लदाख की बहुत पुराणी मांग को मानकर लदाख को अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया पर जम्मू की जनता की 70 वर्षो से चली आ रही है अलग डोगरा राज्य "जम्मू" की मांग को अनसुना कर दिया गया और जम्मू को अलग राज्य ना बनाकर फिर कश्मीर के साथ ही रखा गया। आखिर क्यों जम्मू के साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया गया? क्या जम्मू का कसूर इतना भर है उसने हमेशा राष्ट्रवादी ताकतों का साथ दिया या उसका कसूर इतना भर है बो कश्मीर का एक अंग है, अगर कश्मीर का अंग है तोह लदाख भी तोह जम्मू कश्मीर का ही हिस्सा है उसको क्यों अलग यूनियन टेरिटरी बना दिया गया? अलग यूनियन टेरिटरी बनने के बाद जम्मू की जनता में आक्रोश बड़ा है, धारा 370 टूटने के बाद जिधर "काशी की तर्ज़" पर जम्मू का विकास करने के सपने दिखाए गए थे बो मात्र एक मज़ाक बनकर रह गया जम्मू को मिली तोह सिर्फ शराब की दुकानें ,पहले ही 250 के करीब शराब की दुकाने खुली हुयी थी ...

भारत के स्वर्ण समाज के पड़े लिखे नौजवान क्या सोचते है बेरोजगारी पर?

जैसे की 2014 के बाद भारत में बेरोजगारी बड़ रही है, पर इसका सबसे बड़ा असर स्वर्ण समाज के नौजवानो पर पड़ रहा है। पिछले 70 सालो से जबसे भारत आज़ाद हुआ है तबसे स्वर्ण समाज के नौजवानो को तथ्य हिन् कानूनों में बान्धकर रखा हुआ है और इन 70 सालो में ना जाने कितने स्वर्ण समाज के नौजवानो का भबिष्य इसकी बली चढ़ गया उसका कोई हिसाब नही है। बात करे ऐसे इलाक़ो की जहां स्वर्ण समाज सबसे ज्यादा है जैसे जम्मू कश्मीर की, उधर तोह स्थितियां और घम्बीर है स्वर्ण समाज की बेरोजगारी का आलम यह हो चला है 70 फीसदी पड़े लिखे होने के बाबजूद स्वर्ण समाज के नौजवान अपना मुकाम हासिल नही कर पा रहे है। इसकी बजह है सरकारो द्वारा स्वर्ण समाज की अनदेखी और कोई मदद ना करना, जिनके लिए कभी ना तोह कोई स्कीम निकाली गयी सरकार द्वारा और ना इनको नौकरी और ना कोई मदद की गयी अपना रोजगार तलाशने में। सबसे ज्यादा विदेशो में स्वर्ण समाज के नौजवान ही जा रहे है यह बात और घम्बीर करने वाली है अगर ऐसा ही चलता रहा तोह एक दिन भारत स्वर्ण समाज मुक्त हो जाएगा पर इसपर सोच कौन रहा है कोई नही। सभी जातियो की राजनीती पीटने के चक्कर में व्यस्थ है पर स्वर्ण समाज के...